ज्ञान (Knowledge)
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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe
ज्ञान (Knowledge) वह अनंत सत्य है, जो हमारे जानने से पहले भी था। जिसे हम 'ज्ञात' समझते हैं, वह मात्र हमारी 'जानकारी' (Information) है; जबकि ज्ञान वह अखंड अस्तित्व है जो अज्ञात रहकर भी विद्यमान है।
ज्ञान शाश्वत, स्वयंभू और अविनाशी है। इसका न आदि है, न अंत। जिसे हम 'सीखना' कहते हैं, वह वास्तव में पहले से विद्यमान सत्य का प्रकटीकरण मात्र है। यह एक निराकार चैतन्य के रूप में संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। बोध होने पर यह 'प्रकाशित' (आविर्भाव) हो उठता है और विस्मृति के क्षणों में 'ओझल' (तिरोभाव) हो जाता है। ज्ञान कभी नष्ट नहीं होता, वह केवल प्रकट या अप्रकट रहता है।
सादर,
केशव राम सिंघल
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