ज्ञानेन्द्रियाँ, कमेन्द्रियाँ और मन
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प्रतीकात्मक चित्र साभार जेमिनी गूगल
शरीर के माध्यम से हमें हमारे अस्तित्व का बोध होता है। हमारी चेतना का वाहक हमारा शरीर है। हमारे तीन स्तर के शरीर होते हैं - स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। शरीर ही हमारी अभिव्यक्ति का माध्यम है। स्थूल शरीर को चेतना और दिशा सूक्ष्म और कारण शरीर से मिलती है। हमारे भीतर के चार उपकरण 'अंतःकरण चतुष्टय' - मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार - हमारे निर्णय को प्रभावित करते रहते हैं। स्थूल शरीर के सभी क्रियाकलापों और हाव-भावों की अभिव्यक्ति में इन्द्रियों की भूमिका रहती है। पाँच ज्ञानेन्द्रियों (आँख, नाक, कान, त्वचा और जिह्वा) से हम पाँच विषयों क्रमशः रूप, गंध, शब्द, स्पर्श और स्वाद को जान पाते हैं।
आँख का विषय रूप है और गुण तेज है। सूर्य और अग्नि से हमें प्रकाश मिलता है, तभी हम देख पाते हैं। प्रकाश न हो तो हम देख पाते क्या? नहीं ना। इसी प्रकार, नाक का विषय गंध और गुण पृथ्वी है। कान का विषय शब्द और गुण आकाश है। त्वचा का विषय स्पर्श और गुण वायु है। जिह्वा (जीभ) का विषय स्वाद (रस) और गुण जल है। ज्ञानेन्द्रियों के बिना विषयों का ज्ञान नहीं हो सकता। जिसके आँखें नहीं होती, वह देख नहीं सकता अर्थात् रूप जान नहीं सकता। पाँच कमेन्द्रियाँ (हाथ, पैर, मुख, गुदा और उपस्थ-जननेन्द्रिय) हमारे प्राकृतिक कार्यों को करने के साधन हैं। हाथ से हम वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं। पैर से हम चलते हैं, गतिशील रहते हैं। मुख से हम खाना खाते हैं, बोलते हैं। गुदा से हम मल और पाद का विसर्जन करते हैं। उपस्थ-जननेन्द्रिय के माध्यम से हम मूत्र का विसर्जन करते हैं और यही इन्द्रिय वंश-वृद्धि का भी आधार है। ये सभी आध्यात्मिक क्रियाएँ हैं और इस प्रकार आध्यात्मिक यज्ञ हमारे शरीर में निरंतर चलता रहता है।
इन्द्रियों को समन्वित करने वाला हमारा मन हमारी इच्छाओं को प्रभावित करता है। मन के बारे में कहा जाता है कि यह एक समय में एक ही काम करता है, पर इसकी गति इतनी तेज होती है कि हमें लगता है कि हमारा मन एक समय में कई काम करता है। वास्तव में मन बहुत चंचल होता है, भटकता बहुत तेजी से है, कभी इधर तो कभी उधर, पर एक समय में यह एक ही काम करता हे। इसके द्वारा किए गए कार्यों में काल का बहुत ही सूक्ष्म अंतर होता है। इसकी गति इतनी तीव्र होती है कि यह एक क्षण या पल में मन कई काम कर लेता है।
सादर,
केशव राम सिंघल
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